
कुरुक्षेत्र – धर्म का क्षेत्र : मणिमाला चटर्जी
हरियाणा राज्य का प्राचीन नाम था ब्रह्मेपदेश, आर्यवर्त या ब्रह्मवर्त। भारत के उत्तर में स्थित इस राज्य के उत्तर सीमा में हिमाचल प्रदेश, तथा दक्षिण- पश्चिम में है राजस्थान। हरियाणा राज्य के अन्तर्गत कुरुक्षेत्र एक प्राचीन और पवित्र क्षेत्र माना जाता है जहाँ ‘महाभारत’ का धर्मयुद्ध संघटित हुआ था तथा कृष्ण द्वारा अर्जुन को ‘भागवत् गीता’ की शिक्षा दी गई थी, तथा मनु ऋषि द्वारा ‘मनुस्मृति’ की रचना की गई थी।
प्राचीन पुराण के अनुसार कौरव एवं पाण्डवों के पूर्वज राजा कुरु के नामानुसार इस क्षेत्र का नाम कुरुक्षेत्र हुआ। ‘तैत्तिरीय आरण्यक’ के अनुसार कुरुक्षेत्र की स्थिति तुर्घना (सिरहिंद, पंजाब) के दक्षिण में, खाण्डव क्षेत्र के उत्तर में, मरुस्थल के पूर्व तथा पारित के पश्चिम में है। ‘वामन पुराण’ के अनुसार राजा कुरु ने सरस्वती नदी के किनारे एक क्षेत्र का चयन किया था, आध्यात्मिकता के आठ गुण : तापस, सत्य, क्षमा, दया, शुद्धि, दान, यज्ञ तथा ब्रह्मचर्य की आधारशिला की स्थापना के लिए।
सरस्वती तथा दृषद्वती नदियों के बीच स्थित यह भूमि एक पवित्र तीर्थ है क्योंकि भगवान विष्णु ने राजा कुरु के आदर्श से प्रभावित होकर दो वरदान दिया था। पहले वरदान के अनुसार, राजा के नामांकित यह क्षेत्र एक पवित्र क्षेत्र बना रहेगा तथा इस क्षेत्र में मृत्यु होने से स्वर्ग की प्राप्ति होगी।